Saturday, April 14, 2007

आज फिर तुमपे प्यार आया है !!!!


यूं भीड़ मे अकेले चलते हुये
दिन के अंधेरों मे निकल्ते हुये

जलसों की अकेली तनहाइयों मे
हमदर्दों की अजब सी रुसवाइयोँ मे

हँसते हुये तेरे चेहरे का
ख़यालों पे लबों के इस पहरे का
दिल मे फिर वोही ख़याल आया है




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