Thursday, January 17, 2008

Salam-E-Ishq

मैं सुनाऊँ तुम्हें बात इक रात की
चाँद भी अपनी पूरी जवानी पे था
दिल में तूफ़ान था, एक अरमां था
दिल का तूफ़ान अपनी रवानी पे था
एक बादल उधर से चला झूम के
देखते देखते चाँद पर छा गया
चाँद भी खो गया उसके आगोश में
उफ़ ये क्या हो गया जोश ही जोश में
मेरा दिल धड़का,
मेरा दिल तड़पा किसीकी नज़र के लिए
सलामे-इश्क मेरी जान ज़रा कुबूल कर लो ...

इसके आगे की अब दास्ताँ मुझसे सुन
सुनके तेरी नज़र दबदबा जाएगी
बात दिल की जो अब तक तेरे दिल में थी
मेरा दावा है होंठों पे आ जाएगी
तू मसीहा मुहब्बत के मारों का है
हम तेरा नाम सुनके चले आए हैं
अब दवा दे हमें या तू दे दे ज़हर
तेरी महफ़िल में ये दिलजले आए है.न
एक एहसान कर, एहसान कर,
इक एहसान कर अपने मेहमान पर
अपने मेहमान पर एक एहसान कर
दे दुआएं, दे दुआएं तुझे उम्र भर के लिए
सलामे-इश्क मेरी जान ज़रा कुबूल कर लो ...

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