Tuesday, April 01, 2008

Kaifiyat

झुकी झुकी सी नज़र बेकरार है की नही
दबा दबा सा सही दिल में प्यार है की नही

तू अपने दिल की जावान धद्कानों को गिन के बता
मेरी तरह तेरा दिल बेकरार है की नही

वो पल के जिस में मुहब्बत जवान होती है
उस एक पल का तुझे इन्ताज़ार है की नही

तेरी उम्मीद पे ठुकरा रहा हून दुनिया को
तुझे भी अपने पे ये ऐतबार है की नही

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