Sunday, November 28, 2010

Brainscan




आज बाहर का मौसम कुछ अजीब सा है, कुछ साफ़ दिखाई नहीं देता पर रौशनी के झोंके रह रह कर कहीं से आ रहे हैं। दूर इमारतों के पीछे आतिशबाजियां हो रही हैं, और दूसरी तरफ एक तीखी लाल रौशनी आँखों को चुभ रही है
अभी बारिश हुयी है हवा खुशनुमा है। पर काले स्याह बादल नीचे नजरों के सामने उतर आये हैं और हर कुछ देर में सब धुंधला कर देते हैं। कुछ लोगों का झुण्ड अभी अपनी गाड़ियों पर जोरों से दोस्ती का एक पुराना नगमा गाते हुए गुज़रा, और उनके जाते ही वापिस गहरी ख़ामोशी छा गयी है।

कुछ यूं जान पड़ता है की ये समां भी आज मेरे ख्यालों की नकलें सी उतार रहा है।

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