Friday, January 11, 2013

Dosh ?


मैं अहिल्या पहले छली गयी श्रापित हुयी पाषाण बनी 
दोष मेरा इतना था की पापी इंद्रा सबल था 

मैं सीता लक्ष्मण रेखा में बंध जल भूमि साथ हुयी 
दोष मेरा इतना था की राम में साहस न था 

मैं वीर प्रसवानी स्वयम्वरों में छल बल से राजनीती पर वारी गयी, जौहर चढ़ी 
दोष मेरा इतना था की तुममे एका न था 

मैं अजन्मी कन्या गर्व का नर्क शीत आतप सही, विज्ञान की बलि चढ़ी 
दोष मेरा इतना था की मेरा जनक अज्ञान था 

फिर भी गर्व से कहो की हम मनु की संतान है और मेरा भारत महान है 
                                                                                     
                                                                           - Dr Usha Mishra ( Mom )

Vidrohi Man



टूटती हैं आस्थाएं 
बिखरता है विश्वास 
विद्रोही हुआ मन 
सदियों के अभिशप्त संस्कारों से 
नहीं देना मुझे अग्निपरीक्षा उस संकित मनुज को 
नहीं बंधना मुझे लक्ष्मण रेखाओं में भ्रमित पौरुष की 
मुक्ति के लिए नहीं चाहिये दम्भी देवत्व का पाद प्रहार 
अंध पतिव्रता का पट खोल कर ही रोक पाऊँगी कुरुक्षेत्र का संहार 
ज्वालाओं में जलता यौवन ही अष्टभुजी बन जायेगा 
श्रजन छोड़ संहार पे जो आऊं तो शिव का वक्ष भी क्या रोक पायेगा 


- Dr Usha Mishra ( Mom )