Friday, January 11, 2013

Dosh ?


मैं अहिल्या पहले छली गयी श्रापित हुयी पाषाण बनी 
दोष मेरा इतना था की पापी इंद्रा सबल था 

मैं सीता लक्ष्मण रेखा में बंध जल भूमि साथ हुयी 
दोष मेरा इतना था की राम में साहस न था 

मैं वीर प्रसवानी स्वयम्वरों में छल बल से राजनीती पर वारी गयी, जौहर चढ़ी 
दोष मेरा इतना था की तुममे एका न था 

मैं अजन्मी कन्या गर्व का नर्क शीत आतप सही, विज्ञान की बलि चढ़ी 
दोष मेरा इतना था की मेरा जनक अज्ञान था 

फिर भी गर्व से कहो की हम मनु की संतान है और मेरा भारत महान है 
                                                                                     
                                                                           - Dr Usha Mishra ( Mom )

3 comments:

Anonymous said...

Really touching poem.....awesome..... :)

the-girl-next-door said...

This picture is awesome PM, and the poem is amazing. I read it again and again !

Prashant said...

Thanks. will see if I can get more of her work.

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