Friday, January 11, 2013

Vidrohi Man



टूटती हैं आस्थाएं 
बिखरता है विश्वास 
विद्रोही हुआ मन 
सदियों के अभिशप्त संस्कारों से 
नहीं देना मुझे अग्निपरीक्षा उस संकित मनुज को 
नहीं बंधना मुझे लक्ष्मण रेखाओं में भ्रमित पौरुष की 
मुक्ति के लिए नहीं चाहिये दम्भी देवत्व का पाद प्रहार 
अंध पतिव्रता का पट खोल कर ही रोक पाऊँगी कुरुक्षेत्र का संहार 
ज्वालाओं में जलता यौवन ही अष्टभुजी बन जायेगा 
श्रजन छोड़ संहार पे जो आऊं तो शिव का वक्ष भी क्या रोक पायेगा 


- Dr Usha Mishra ( Mom ) 

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