Saturday, September 27, 2014

roads

.. Akele hone se tanha hone ka safar bahut lamba hota hai ..Rasta kab tara ya mera hota hai.. shab e barat ka bhi savera hota hai   

Thursday, September 11, 2014

Purple Rain

भीगे कोयले पर सुलगती हुयी आँखें   . . . मैंने देखा था उसे अबकी बारिश में सपने डुबोते हुए


Saturday, March 01, 2014

Monochrome

Isn't this how life is in general :) 




Monday, February 03, 2014

Watchmaker Analogy

शहर के बाज़ार की उस तंग गुमशुदा गली मे, जहां वक़्त भी सालों से ठहरा हुआ है. बैठा हुआ है वो एक टूटी सी मेज सजाये.
कुछ टूटे पुर्जे कुछ चमकती पट्टियाँ, बेतरतीब तरीके से जमा हुआ कुछ नया पुराना सामान. अंधियारी गली मे जहां हाथ को हाथ देखने के लिये १२ बजे के सूरज का इंतेज़ार रहता है, उसने मेज का एक कोना खटके वाले लेम्प से रोशन कर रखा है. 

लोग कहते हैं की वो तुम्हारी आवाज एक बार मे सुन नहीं सकता या शायद कभी सुन कर भी अनसुना कर देता हो. लेम्प की तेज रोशनी मे सालों तक एक आंख मींचे हुये और दूसरी पर मोटा लेंस लगाये अब उसे इंसान भी आसानी से पहचान नहीं आते. उसकी आवाज शायद ही कभी किसी ने सुनी हो 

उसकी टेढ़ी मेढ़ी उंगलियाँ जो अब खुद एक औजार बन गयी हैं बड़े सलीके से घड़ियाँ खोला करते हैं, और ये घड़ियाँ भी कभी उसके लिये नयी पुरानी नहीं पड़ती, हर किसी के लिये एक एक टिक कर बारह बारी साठ चक्कर. नयी पुरानी, देसी विदेसी हर तरह की घड़ियाँ एक डब्बे मे रखी हैं, सब अपनी बारी के लिये. 

उसे सुनाई देती है ८६४०० मे से क़म होने वाली कोई एक टिक. देख पाता है वो उन छोटे छोटे पुर्जों को जो अपने आप से भी अनजान रहते हैं. ख्याल रहता है उसे उस हर एक हिस्से का जो घड़ी के तयशुदा तरीके से चलते रहने के लिये जरूरी है. 

इस गुमशुदा घडीसाज के लिये वक़्त भी अपने वक़्त का इंतेज़ार करता है 

P.S. Inspired by the Watchmaker Analogy